Thursday, 14 November 2013

तुम याद आते हो

हाँ तुम याद आते हो ,
दर्द भरे दिल में दो पल कि खुशियां भर जाते हो ,
मैं अब भी अपने मैं ही मशहूर हूँ ,
ऐ-जिंदगी मेरी तू मेरे पास नहीं हैफिर भी जिंदगी के नशे में चूर हूँ ,
केवल अपनी और अपनों कि करने मैं मशुर हूँ ,फिर भी तुम याद आते हो ॥ 

बाँट दिए सब पल जीवन के एक पल आराम का ,

 प्यार का ,दुलार का पापा कि पफटकार  का माँ के प्यार का ,
एक पल इख्तियार का ,ऊपर वाले के सत्कार का ,
दूजे पल कि जीवन मैं कमी है ,
फिर भी न जेन कैसे ,तुम याद आ ही जाते  हो ॥ 

सब कुछ संभल चूका है ,वक़्त अपनी करवट बदल चूका है
 मेरे हिस्से का दर्द जैसे जिम्मेदारियों मैं तब्दील हो चूका है ,
पहले से थोड़ी गुमसुम हूँ ,अब तो मैं चुलबुली भी बहुत कम हु
,शैतानियों कि जगह आराम करती हूँ ,अब मैं सिर्फ दूजो के लिए काम करती हूँ ,
फिर भी न जेन क्यों  तुम याद आते हो ॥ 

लोग अब मुझे जिम्मेदार समझते हैं ,अपने लिए हमेशा तैयार समझते हैं,
अब मैं अपनों का ही दम भर्ती हूँ ,शायद थोड़ी गुमसुम हूँ ,
लोग मेरे अकेले पैन को देखते हैं ,मुझसे अक्सर पूछते हैं ,
क्यू तुम इतनी गुमसुम हूँ,किस गम मैं इतनी गुम  हो ,
क्या किसी गम ने तुम्हे सताया है ,क्या फिर तुम्हे फिर वही याद आया है ,
मैं ना में हामी भर्ती हु ,हस्ते हस्ते खभी देती हूँ तुम याद भी कहाँ आते हो ॥ 

मैं इन सब से परेशां हुई ,इन यादों के घेरे से हैरान हुई ,
मैंने खुद से ही आज ये बोला तुम याद नहीं आते हो 
मेरे दिल ने फौरन  मुझे झंझोड़ा ,और कचोटा ,
दम भरते हुए अंदर ही अंदर ही अंदर बोला 
अंदर ही अंदर बोला "हाँ अब भी तुम याद आते हो "
हाँ तुम याद आते हो ॥ 


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