Friday, 30 August 2013

आज फिर जिंदगी में वही मुकाम आया

आज फिर जिंदगी में वही मुकाम आया ,
आज फिर तेरे अधरों पे किसी और का नाम आया,
तेरे साथ चाँद लम्हे यूँ बीते के तुझे जाते देख हर पल जहन में सदियों सा छाया,
तुझे तो दुआ ही दी हर पल गम -ए-इश्क़ आज फिर हमारे नाम आया,
क्यों आखिर क्यों अधरों पे तेरे किसी और का नाम आया। |
बाहों का वो सिर छोड़ा तुमने जो हमेशा सिर्फ तेरे काम आया
आच्छा ही किया ,
उस दिल को तोडा तुमने जो ऐ-इंसा तुझे पूजने के काम आया 

आज फिर जिंदगी में वाई मुकाम आया | |

Sunday, 18 August 2013

ज़माने का दस्तूर ही उल्टा पुल्टा है
जब हम कहते थे हम नेक दिल हैं ,
हर कोई सुनकर ही अनसुना करता था ,

आज हमने  इशारे ही क्या किये के हम गुनेहगार हैं ,
तो बहरा भी कान खोलकर सुनता है ,
कल हम हर दर पर भटकते थे के कोई इस प्यार भरे दिल का सहारा हो
आज हमारी अनकही बेहिजाबी सुनकर लाखों लोग ऐसे मिले जैसे हर पल हमें ही आपने जहाँ मैं पुकारा हो | |


Saturday, 17 August 2013

सवाल




क्या कोई है अपना जो अनकही सुन सकेगा ,
क्या कोई  है ऐसा जो  बिन देखे आंसू से मोती चुन सकेगा?
कहने को है लाखों मेरे ,क्या कोई बिन मतलब मेरा बन सकेगा?
तुमने कहा तुम मेरे हो ,क्या जग तुम्हें सिर्फ मेरा बनने देगा?
दिल की बातें तुम्हे सुनानी चाही कई बार ,
 क्या ये लम्हा थोड़ी देर थम सकेगा ??
                                                    
                                                  
                                                    
                                      लेकर आये  थे मेरे जग में तुम बहार ,
                                       क्या है कोई कमल जो मेरे लिए खिलसकेगा?
                                       देखा जब तुम्हे तो सिर्फ अक्स छूना चाहा ,
                                       क्या है कोई ऐसा आईना जो

                                      हमारे अक्श  को एक दिखा सकेगा ?
                                  क्या है कोई ऐसा खुद जो तुम्हे  मेरा बना सकेगा?
                              क्या तक़दीर में तुम्हारी कोई मेरा नाम लिखासकेगा?
                                है कोई  तो बता दो मुझे 
मै अपना सबकुछ लुटाकर                                                         उसे मनाऊंगी

                                   फिर सोचती हु ऐसा किया तो तुम्हारी ही होने का                                                          वादा कैसे निभापाउंगी??

 

अनकही

दिल ने दिल से जो कही थी  अभी तक मुझे मीठी सी वो बात याद है,

तुझसे कभी न मिली जो मुझे वो सौगात याद है,

तुझसे मिलने की हज़ार कोशिशें कि पर तू ना मिला कितना रोया था ये 

दिल,कितने आये थे इस दिल में जज़्बात याद हैं

  तेरे लिए जो पानी बन के बहे  मेरे खून के आंसू जो सारी रह मुझे एकसार  याद हैं ,

शाम तक का वक़्त देने के बाद भी ,

तेरे  इंतजार में थी पल पल जो गुज़ारी मुझे अभी तक वो रात याद है ,

इतना दर्द मिला के खुद टूट गयी मैं आहट सुनते ही फिर जिन्दा होजाती हूँ ,

क्यूंकि मुझे अभी तक वो तेरा झूठा जताया प्यार याद है। ………


मुझे तेरा प्यार याद है.…… 



*जिंदगी की पुकार**

                                                                              

 **जिंदगी की पुकार *

*इस से पहले के तुम -तुम और हम-हम होजाएं ,

इस से पहले के नज़दीकियां गुम  होजाएं ,

वो एक एहसास, वो दोस्ती वो प्यार सुन्न पड़ जाये ,

चलो बसा लें एक और ख्वाब इन आँखों में  ,

फिर जगा लें तुम्हें हम आपनी यादों में ,

फिर वही  खुशियों का जहाँ बेशुमार होजाये,

इससे पेहेले के ये अँखियाँ बंद पड़जाएँ। ………।


इससे पेहेले के ये आँखें नाम होजाएं ,

के इस जिंदगी में गम ही गम होजाये ,

इससे पेहेले के आज़ादी का ये आसमां गुम  होजाये ,

वो अल्हडपन वो पागलपन वो बचपन खो जाये ,

एक बार फिर फैलाओ अपनी बाहें ,

एक बार फिर दो इज़ाज़त हमें,के एकबार फिर हम सो जाएँ। ....... 


न रहे हकीकत  से वास्ता हमारा ,

न हो जिंदगी का एक भी दुःख याद मुझे ,जो मैंने तुम्हारे बिन गुज़ारा ,

बस कोई और नहीं चाहिए मुझे ,चाहें वो हो जीवन हमारा ,

एक तुम मिलो बस मेरी आँखें जो देखें सिर्फ तुम्हारा नज़ारा 

तीसरा मुझे कोई नहीं चैये ,इतने में ही कर लुंगी अपने जीवन का गुज़ारा। ……… 


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