क्या कोई है अपना जो अनकही सुन सकेगा ,
क्या कोई है ऐसा जो बिन देखे आंसू से मोती चुन सकेगा?
कहने को है लाखों मेरे ,क्या कोई बिन मतलब मेरा बन सकेगा?
तुमने कहा तुम मेरे हो ,क्या जग तुम्हें सिर्फ मेरा बनने देगा?
दिल की बातें तुम्हे सुनानी चाही कई बार ,
क्या ये लम्हा थोड़ी देर थम सकेगा ??
लेकर आये थे मेरे जग में तुम बहार ,
क्या है कोई कमल जो मेरे लिए खिलसकेगा?
देखा जब तुम्हे तो सिर्फ अक्स छूना चाहा ,
क्या है कोई ऐसा आईना जो
हमारे अक्श को एक दिखा सकेगा ?
क्या है कोई ऐसा खुद जो तुम्हे मेरा बना सकेगा?
क्या तक़दीर में तुम्हारी कोई मेरा नाम लिखासकेगा?
है कोई तो बता दो मुझे मै अपना सबकुछ लुटाकर उसे मनाऊंगी
फिर सोचती हु ऐसा किया तो तुम्हारी ही होने का वादा कैसे निभापाउंगी??
mast hai yaar...
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