Saturday, 17 August 2013

*जिंदगी की पुकार**

                                                                              

 **जिंदगी की पुकार *

*इस से पहले के तुम -तुम और हम-हम होजाएं ,

इस से पहले के नज़दीकियां गुम  होजाएं ,

वो एक एहसास, वो दोस्ती वो प्यार सुन्न पड़ जाये ,

चलो बसा लें एक और ख्वाब इन आँखों में  ,

फिर जगा लें तुम्हें हम आपनी यादों में ,

फिर वही  खुशियों का जहाँ बेशुमार होजाये,

इससे पेहेले के ये अँखियाँ बंद पड़जाएँ। ………।


इससे पेहेले के ये आँखें नाम होजाएं ,

के इस जिंदगी में गम ही गम होजाये ,

इससे पेहेले के आज़ादी का ये आसमां गुम  होजाये ,

वो अल्हडपन वो पागलपन वो बचपन खो जाये ,

एक बार फिर फैलाओ अपनी बाहें ,

एक बार फिर दो इज़ाज़त हमें,के एकबार फिर हम सो जाएँ। ....... 


न रहे हकीकत  से वास्ता हमारा ,

न हो जिंदगी का एक भी दुःख याद मुझे ,जो मैंने तुम्हारे बिन गुज़ारा ,

बस कोई और नहीं चाहिए मुझे ,चाहें वो हो जीवन हमारा ,

एक तुम मिलो बस मेरी आँखें जो देखें सिर्फ तुम्हारा नज़ारा 

तीसरा मुझे कोई नहीं चैये ,इतने में ही कर लुंगी अपने जीवन का गुज़ारा। ……… 


http://www.facebook.com/sanchi.parasheri

No comments:

Post a Comment