**जिंदगी की पुकार *
*इस से पहले के तुम -तुम और हम-हम होजाएं ,
इस से पहले के नज़दीकियां गुम होजाएं ,
वो एक एहसास, वो दोस्ती वो प्यार सुन्न पड़ जाये ,
चलो बसा लें एक और ख्वाब इन आँखों में ,
फिर जगा लें तुम्हें हम आपनी यादों में ,
फिर वही खुशियों का जहाँ बेशुमार होजाये,
इससे पेहेले के ये अँखियाँ बंद पड़जाएँ। ………।
इससे पेहेले के ये आँखें नाम होजाएं ,
के इस जिंदगी में गम ही गम होजाये ,
इससे पेहेले के आज़ादी का ये आसमां गुम होजाये ,
वो अल्हडपन वो पागलपन वो बचपन खो जाये ,
एक बार फिर फैलाओ अपनी बाहें ,
एक बार फिर दो इज़ाज़त हमें,के एकबार फिर हम सो जाएँ। .......
न रहे हकीकत से वास्ता हमारा ,
न हो जिंदगी का एक भी दुःख याद मुझे ,जो मैंने तुम्हारे बिन गुज़ारा ,
बस कोई और नहीं चाहिए मुझे ,चाहें वो हो जीवन हमारा ,
एक तुम मिलो बस मेरी आँखें जो देखें सिर्फ तुम्हारा नज़ारा
तीसरा मुझे कोई नहीं चैये ,इतने में ही कर लुंगी अपने जीवन का गुज़ारा। ………
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