ज़माने का दस्तूर ही उल्टा पुल्टा है
जब हम कहते थे हम नेक दिल हैं ,
हर कोई सुनकर ही अनसुना करता था ,
आज हमने इशारे ही क्या किये के हम गुनेहगार हैं ,
तो बहरा भी कान खोलकर सुनता है ,
कल हम हर दर पर भटकते थे के कोई इस प्यार भरे दिल का सहारा हो
आज हमारी अनकही बेहिजाबी सुनकर लाखों लोग ऐसे मिले जैसे हर पल हमें ही आपने जहाँ मैं पुकारा हो | |
hmmm
ReplyDeletesahi baat hai...
kya baat hai ...............
ReplyDelete